आर्य समाज सैक्टर-11 द्वारका नई दिल्ली

अथर्ववेद पारायण महायज्ञ : शामली

शामली में 3 से 8 नवंबर तक होगा अथर्ववेद पारायण महायज्ञ, वैदिक विद्वानों का होगा समागम शामली। जनपद शामली के गोहरपुर...
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गुरुकुल विश्वभारती रोहतक में भव्य 35वां वार्षिक महोत्सव एवं स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह 4-5 नवंबर को रोहतक, हरियाणा। गुरुकुल विश्वभारती,...
सत्यार्थ प्रकाश परीक्षा 2026: गुरुकुलों के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन लिखित परीक्षा, जानें पुरस्कार और नियम सत्यार्थ प्रकाश परीक्षा 2026: वैदिक...
गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना वर्ष पर होगा अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी मुख्य...
आर्य समाज नजफगढ़ (नाहरगढ़) का 114वाँ वार्षिकोत्सव 30 अक्टूबर से, तीन दिवसीय धार्मिक एवं वैदिक उत्सव का होगा आयोजन नई दिल्ली।...
आर्य समाज, सुभाषनगर, अयोध्या में 58वां वार्षिकोत्सव 17 से 20 दिसंबर तक, प्रतिदिन होगा महायज्ञ एवं प्रवचन अयोध्या। आर्य समाज, सुभाषनगर,...
आर्य समाज नवाबगंज गोंडा के शताब्दी समारोह का आयोजन 27 से 30 अक्टूबर तक, यज्ञ और भजन-प्रवचन होंगे मुख्य आकर्षण गोंडा,...
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 114वें स्थापना वर्ष एवं स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह का आयोजन 31 अक्टूबर से कुरुक्षेत्र, हरियाणा: गुरुकुल कुरुक्षेत्र...
गुरुकुल राजघाट में बलिदान शताब्दी समारोह 2026, 25 से 27 अक्टूबर तक होगा भव्य आयोजन बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश: महेश्वरानन्द वेद भारती...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी संन्यास दूर देहाभ्यास किया सानन्द संन्यास लिया।तीव्र आत्माभ्यास वेदाभ्यास ते बुझाय के॥ भए मूलशंकर से दयानन्द सरस्वती।योग की जगाई...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी क्षत्रिय भारत भूमि के रणधीर राजपूत वीर।दुर्बल को रक्षक वो भक्षक सो भयो है॥ एक मुक्ति काज लाख-लाख बलिदान...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी गुरु की शरण में भारत की एक भव्य विभूति विरजानन्द।गुरुवर शरण में दयानन्द आयो है॥ प्रज्ञाचक्षु गुरुजी को क्रोधी...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी वैश्य ब्राह्मण क्षत्रिय शूद्र वर्ण को आधार वही।वैश्य वर्ण मरण के चरण तक आयो है॥ वैश्य ने विसार...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी शूद्र बड़े-बड़े पड़े कहाँ शूद्रन की कथा कौन।शूद्र पे समृद्ध दुःख दर्द को छवायो है॥ धर्म भयो छुआछूत...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी देश की दुर्दशा भारत भूमि में वेद धुनि न सुनाई कहीं।सुना बाइबिल सुनाई आयतें कुरान की॥ ईसू की...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी शुद्धि खुले रखे द्वार धर्म छोड़ जानेवाले काज।आनेवाले काज दोष दीनो है अशुद्धि को॥ अति मतिमन्द अंध धर्म अधिकारी...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी चातुर्वर्ण ब्रह्मविद्यायुक्त वर्ण ब्राह्मण जो शीर्षरूप।हो गए विमुक्त वही उक्त अधिकार ते॥ क्षत्रिय बाहुस्वरूप हीन पराधीन भयो।मुक्ति के सुभक्त...
दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी बानी में भवानी है काले कर्मचारियों के काल के कमान जैसी।जुग की जबान रामबाण तेरी बानी है॥ केते-केते कोटि...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी संगठन जहां वर्ण चार वहां आज तो अपार भयो।हिंदू-हिंदुत्व में भेद-भाव को बढ़ायो है॥ आपस की फूट चली छूट...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी कलिकाल नेह भयो नष्ट अवशेष कष्ट क्लेश भयो।देश में विशेष भयो विष क्रेम-व्याल को॥ धर्म दूर-दूर भयो अधर्म को...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी न तस्य प्रतिमा अस्ति लोगों ने बनायी प्रभु प्रतिमा पूजनकाज।अपनी अपूर्णताएं उनमें लगाई हैं॥ प्रतिमा को लगे भूख-प्यास-शीत-ताप लगे।सोने...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी बोल-बाला धर्म को उठाने वाला अधर्म को ढानेवाला।आंधी को उड़ानेवाला ज्ञान का उजाला तू॥ आप ही के आप वस्त्रालंकारें...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी नरसिंह अवतार भारत में भया अनाचार का अपार भार।हुआ हाहाकार हर्नाक्ष के हुंकार सा॥ धर्म भयो लोप महापाप...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी सरस्वती के सपूत सत्य की कमान तेरी सत्य के ही शब्द-बाण।तेरे नैन का निशान सत्य की उन्नति...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी आर्यत्व उद्धारक पूर्व को प्रकाश कैधों पृथ्वी पे प्रकट भयो।कैधों उत्तरायण को तेज दीप आयो है।। असत्य के सागर...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी झंडाधारी आया झंडाधारी वेद धर्म का उडाया झंडा।मंत्र ओम्कार तें जगत को जगायो है।। पाप-ताप, क्लेश-द्वेष, जेर-जुल्म जारिबे को।कहा...
तेज का मिनारा कैते महिपतियों को आर्यत्व की दीनी आन।कैते कैते मानियों के मान को उतारा है।। तेरी अप्रतिम तपश्चर्या की तेजसधारा।तेजस्वी...
दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी दयानिधि जोधपुरपति को सुबोध दयानन्द देत।राज गणिका का दिल द्वेष ने जला दिया।। महर्षि के पाचक को कीनो वश...
दयानन्द बावनीकवि — दूलेराय कराणी पाखण्ड खण्डनी पताका हरिद्वार धाम कुम्भमेले के झमेले बीच।भारत की जनता अपार जब आई है॥ मोटे-मोटे साधु-संत...
दयानन्द बावनीकवि — दूलेराय कराणी पाखण्ड खण्डन पर अनल पे नीर जैसो नीर पे समीर जैसो।जैसो धन तिमिर पे तरणी को...
दयानन्द बावनीकवि — दूलेराय कराणी निःस्पृहता उदयपुर राजन सज्जनसिंह ने एक समय।स्वामीजी को बात एक बताई ईनाम की॥ महर्षि न कीजे मूर्तिपूजा...
दयानन्द बावनीकवि — दूलेराय कराणी जेते नभ तारे हैं दलित तारक सारे समाज के सुधारक।आर्य नारी उद्धारक अनाथ उबारे हैं॥ थापे आर्य...
दयानन्द बावनीकवि — दूलेराय कराणी शास्त्रार्थ विजय अनूप शहरवाले शास्त्री हीरावल्लभ ने।शास्त्रार्थ विवाद काज सभा को बुलाई है॥ सभा बीच रखी प्रतिमा को...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी सहिष्णुता सत्य को प्रकाश न सोहात अन्ध उलूक को।असत्य-निवास अन्धकार वास जाको है।। सत्यनिष्ठ स्वामीजी ने केते-केते...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी अन्तिम इच्छा आए अजमेर वहाँ जहर ने लिया घेर।वैद्यो नारायणो हरिः ऐसो वक्त आयो है।। अंतिम बिदाई...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी मलय के समीर थे भारती की भीड़ पाप-पीड़ को पिछाननी धीर।वीर दयानन्द गुण-सागर गंभीर थे।। प्यारे वेदोंवाले सारे...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी रखी आन हिन्दवान की हाथ रखे वेद, वेद-धर्म को विख्यात रखे।तात रखी तुमने ही ख्यात हिन्दुस्थान की।। जात...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी भारत के शेर दीनानाथ की दया से आए दयानन्द देव।दीन-हीन देश के सुवर्ण के सुमेर थे।। वेदधर्म व्याप्त...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी जयकार भारती के नन्द दया आनन्द के कन्द दया।नन्द ने उड़ाई नीन्द हिन्द आर्यवृन्द की।। तीव्र तपको...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी तू न होता तो धर्म-कर्म-ध्याता नवयुग निर्माता तू ही।भव्यतम भारत के भाग्य का विधाता तू।। तेज तेरा ताता...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी लेटा तेरी गोदी बीच बेटा दयानन्द सा टंकारे का बंका तेरे मन्त्रों ने बजाया डंका।पाखण्डों की लंका...
दयानन्द बावनी कवि : दुलैराय काराणी शहीदों के सिरमौर आर्यत्व की इमारत केते-केते शहीदों की।खून पे खड़ी है ऐसे प्रेम-धर्म-पूर थे।। वीर...
दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी ग्रन्थ प्रकाशन आयार्याभिवचन विज्ञान व्यवहारशभु।भ्रान्ति निवारण संध्या वेदांग प्रकाश है।। पंच महायज्ञविधि सत्य असत्य विवेका।अध्याध्यायी खण्डनव्यामन्तव्य प्रकाश...
ओछी संगत बैठकर पीने लगा शराब ओछी संगत बैठकर पीने लगा शराब।धर्म गया इज्जत गई हो गई अकल खराब॥ जो आए सो...
सत्यार्थ प्रकाश कैधों अवनि को एक अजर-अमर ग्रन्थ।कैधों आर्य समाज को आत्म उल्लास है।। कैधों अनमोल महा रत्नों को रत्नाकर की।वेद को...
शेर बब्बर था भारत के नरवर जगत के गुरुवर।पुरुष-प्रवर तू प्रखर वीरवर था।। नेता नर नाहर तू अडग गिरिवर तू।सदा सुखकर तू...
बल दल दया-बल, मया-बल विमल विनोद बल।वेद शास्त्र बल का सबल शस्त्र बल था।। विद्या बल वाणी बल युक्ति प्रयुक्ति का बल।पूर्ण...
ऊपर को उठ-उठकर अग्नि करती हमें इशारामुखड़ा ऊपर को उठ-उठकर अग्नि करती हमें इशारा।जीवन में ऊपर को उठना है कर्तव्य हमारा॥...
ऐसी कृपा हो भगवान्, घर-घर में यज्ञ हवन हो।वर्षा हो शान्ति की, सुख की भरी पवन हो। टेक॥ उपकार हो सभी...
वसन्ततिलका छन्दः श्लोकः उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीःदैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्यायत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः॥ अर्थ:निरन्तर उद्योग (परिश्रम) करने वाले...
वसन्ततिलका छन्दः जाड्यं धियो हरति सिंचति वाचि सत्यम्,मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति।चेतः प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिम्,सत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम्॥ अर्थ:सत्संगति (अच्छे लोगों...
वसन्ततिलका छन्दः भिक्षाऽशनं तदपि नीरसमेकवारंशय्या च भूः परिजनो निजदेहमात्रम्।वस्त्रं च जीर्णशतखण्डमयी च कन्था,हा-हा तदपि विषयान्न परित्यजन्ति।।(भर्तुहरिकृत- नीतिशतक, श्लो. २६) भावार्थ- भिक्षा का...
वसन्ततिलका छन्दः प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः,प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः।विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः,प्रारभ्य चोत्तमजना न परित्यजन्ति।।(भर्तुहरिकृत- नीतिशतक, श्लो. २६) भावार्थ- नीच अधम...
वसन्ततिलका छन्दः व्याघ्रीव तिष्ठति जरा परितर्जयन्ती,रोगाश्च शत्रव इव प्रहरन्ति देहम्।आयुः परिस्रवति भिन्नघटादिवाम्भो,लोकस्तथाप्यहितमाचरतीति चित्रम्।।(भर्तुहरिकृत- वैराग्यशतक, श्लो. ९६) भावार्थ- शेरनी के समान भयभीत करने...
वसन्ततिलका छन्दः मत्तेभकुम्भदलने भुवि सन्तिः शूराः,केचित् प्रचण्ड-मृगराज-वधेऽपि दक्षाः।किन्तु ब्रवीमि बलिनां पुरतः प्रसह्य,कन्दर्पदर्पदलने विरला मनुष्याः।।(भर्तुहरिकृत- नीतिशतक, श्लो.५८) भावार्थ- मैं मानता हूं कि संसार...
वसन्ततिलका छन्दः निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु,लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा,न्याय्यात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।(भर्तृहरिकृत- नीतिशतक,...
शिखरिणी छन्दः शवाकारं यावद्भजति मनुजस्तावदशुचिःपरेभ्यः स्यात्क्लेशो जननमरणव्याधिनिलयः।यदात्मानं शुद्धं कलयति शिवाकारमचलंतदा तेभ्यो मुक्तो भवति हि तदाह श्रुतिरपि॥३६७॥ ॥ विवेकचूडामणि ॥ अर्थ: श्रुति भी यही...
शिखरिणी छन्दः वयं येभ्यो जाताश्चिरपरिगता एव खलु तेसमं यैः संवृद्धाः स्मृतिविषयतां तेऽपि गमिताः।इदानीमेते स्मः प्रतिदिवसमासन्नपतनागतास्तुल्यावस्थां सिकतिलनदीतीरतरुभिः॥३४॥ ॥ वैराग्यशतकम् ॥ अर्थ: जिन माता-पिता से...
शिखरिणी छन्दः करे श्लाध्यस्त्यागः शिरसि गुरुपादप्रणयितामुखे सत्या वाणी विजयि भुजयोर्वीर्यमतुलम्।हृदि स्वच्छा वृत्तिः श्रुतमधिगतं च श्रवणयोःविनाऽप्यैश्वर्येण प्रकृतिमहतां मण्डनमिदम्॥६१॥ ॥ भर्तृहरि नीतिशतकम् ॥ अर्थ: सुपात्र...
शिखरिणी छन्दः आराध्यः स्वामी तुरगलचित्ता क्षितिभुजोवयं तु स्थूलेच्छा महति च पदे बद्धमनसः।जरा देहं मृत्युर्हरति सकलं जीवितमिदंसखे नान्यच्छ्रेयो जगति विदुषोऽन्यत्र तपसः॥४८॥ ॥ वैराग्यशतकम्...
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