दयानन्द बावनी
कवि : दुलैराय काराणी
मलय के समीर थे
भारती की भीड़ पाप-पीड़ को पिछाननी धीर।
वीर दयानन्द गुण-सागर गंभीर थे।।
प्यारे वेदोंवाले सारे हिन्द के सितारे मात-
भारती के नैन-तारे न्यारे नरवीर थे।।
अभय अभ्रान्त आप आप को अमाप ताप।
आप ही अमीर आप नंगे ही फकीर थे।।
शीतल शिशिर में बसंत बिलसाय दीनो।
दयानन्द महर्षि मलय के समीर थे।।४२।।






















