दयानन्द बावनी
कवि : दुलैराय काराणी
लेटा तेरी गोदी बीच बेटा दयानन्द सा
टंकारे का बंका तेरे मन्त्रों ने बजाया डंका।
पाखण्डों की लंका जलाने में हनुमन्त सा।।
क्रान्तिकारी कर्मयोगी क्रान्तदर्शी कर्मवीर।
धर्म के ज्योतिर्धर ज्ञान में गयंद सा।।
परम समर्थ सत्य तत्व प्रतिपादन में।
असत्य उच्छाटन में अधीर अमंद सा।।
धन्य मात भारती हजार बार धन्य-धन्य।
लेटा तेरी गोदी बीच बेटा दयानन्द सा।।४९।।
























