दयानन्द बावनी
कवि : दुलैराय काराणी
शहीदों के सिरमौर
आर्यत्व की इमारत केते-केते शहीदों की।
खून पे खड़ी है ऐसे प्रेम-धर्म-पूर थे।।
वीर लेखराम धर्मवीर राजपाल आदि।
संन्यासी शहीद श्रद्धानन्द मशहूर थे।।
हुए बलिदान हिन्द गौरव गोविन्द गुरु।
केसरी कराल वीर बंदा बहादुर थे।।
काराणी कहत सत शहीदों के सिरमौर।
ऋषि दयानन्द सब शूरन में शूर थे।।४८।।
























