दयानन्द बावनी
कवि — दूलेराय कराणी
पाखण्ड खण्डनी पताका
हरिद्वार धाम कुम्भमेले के झमेले बीच।
भारत की जनता अपार जब आई है॥
मोटे-मोटे साधु-संत संन्यासी महन्त आए।
डेरा-तम्बू डारे केती छावनी छवाई है॥
सभा-समूहों में सप्तसर पर महर्षि ने।
वेद-धर्मोपदेश की झड़ी बरसाई है॥
हिम्मत के वीर सत्यवीर दयानन्द जी ने।
पाखण्ड-खण्डनी पताका तहां चढ़ाई है॥ ३४॥
























