दयानन्द बावनी
कवि — दूलेराय कराणी
पाखण्ड खण्डन पर
अनल पे नीर जैसो नीर पे समीर जैसो।
जैसो धन तिमिर पे तरणी को तीर है॥
जैसो कंसराज पर चक्रधर कृष्णचन्द्र।
जैसो नक्षत्रियमैं परशुराम वीर है॥
कराणी कहत जैसे पहाड़ पे वज्रपात।
जैसो राज रावण पे राम रणधीर है॥
जैसो मृगझुण्ड पे महान मृगराज वैसो।
पाखण्ड के पन्थ पर दयानन्द वीर है॥ ३२॥
























