भारतरत्न मूलशंकर ने मंगल मूल विचार किया।
भारतरत्न मूलशंकर ने मंगल
मूल विचार किया।
होकर दयानन्द ऋषि नामी,
जीवन परमोदार किया।
कौतुक देख चपल चूहे का,
अबोधज रोग किया।
भवसागर के तर जाने का,
परमोचित उद्योग किया ॥
त्याग कुटुम्ब विलास विसारे,
बनके गृही न भोग किया।
ब्रह्मचर्यव्रत धार सिधारे,
सिद्ध मनोरथ योग किया ॥
बनकर योगिराज विज्ञानी,
वैदिक धर्म प्रचार किया।
होकर दयानन्द ऋषि नामी,
जीवन परमोदार किया ॥
























