अछूतोद्धार के सूत्रधार : आर्य समाज

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अछूतोद्धार के सूत्रधार : आर्य समाज

अछूतोद्धार के सूत्रधार : आर्य समाज

जब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भंगी के हाथ का जल ग्रहण किया

★ 15 अक्टूबर 1928 ई० से आर्य समाज दानापुर का स्वर्ण जयंती समारोह प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर अछूतोद्धार सम्मेलन आयोजित हुआ।

★ भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉक्टर राजेंन्द्रप्रसाद ने अछूतोद्धार सम्मेलन के अध्यक्ष पद से भाषण करते हुए महर्षि दयानन्द के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और दानापुर आर्यसमाज को बिहार का पावन-पुण्य स्थल बताया।

★ इस सम्मेलन के अवसर पर अछूतोद्धार को वास्ततिक रूप देने के लिए जब सभा में एक भंगी के हाथ से जनता में जल बंटवाया जाने लगा तो सभा में भगदड़ मच गयी, बहुत-से लोग मेहतर के हाथ से जल ग्रहण को पाप समझते हुए डरकर भागने लगे।

★ इस समय डॉक्टर राजेंन्द्रप्रसाद ने भंगी के हाथ से जल को बड़े प्रेम से ग्रहण किया और कहा कि “यह तो इस पावन तीर्थ का पवित्र जल है। इसे यहाँ सभी लोगों को ग्रहण करना चाहिए। इसी प्रकार हम वास्वव में अछूतोद्धार के कार्य को सफल बना सकेंगे।”

★ उनके इस भाषण का जनता पर बड़ा प्रभाव पड़ा। पण्डित वेदब्रत वानप्रस्थी की अध्यक्षता में एक समिति इस उद्देश्य से गठित की गयी कि यह अछूतों की समस्याओं का विवेचन करे और इस समस्या के निवारण के उपायों का निर्देश करे।

प्रस्तुति :
आचार्य संजय सत्यार्थी
आर्योपदेशक, पटना
📞 7717766151

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