खुल गई, खुल गई रे
खुल गई, खुल गई रे पोपों की सारी पोल।
ऋषिवर तेरे आने से ।।
पीर और पैगम्बर सारे भागे छोड़ अखाड़े हैं।
रच सत्यार्थ प्रकाश ऋषि ने सबके पैर उखाड़े हैं।।
एजी ढोंगी पाखण्डी हुए हैं डाँवाडोल । 1 ।
खुल गई, खुल गई रे पोपों की सारी पोल।
ऋषिवर तेरे आने से ।।
वेद शास्त्र को छोड़ गीत जो गाने लगे पुराणों।
ऋषियों के वंशज बन बैठे, चेला रंडी भांड़ों के ।।
एजी उनकी होती है अब चारों ओर मखोल। 2।
खुल गई, खुल गई रे पोपों की सारी पोल।
ऋषिवर तेरे आने से ।।
नाम धर्म का लेकर भारी पाप कमाए जाते थे।
जड़ देवों पर भैंसे, बकरों की बलि खूब चढ़ाते थे ।।
एजी स्याने भक्तों के भी फूटे हैं ढप-ढोल । 3।
खुल गई, खुल गई रे पोपों की सारी पोल।
ऋषिवर तेरे आने से ।।
दयानन्द की दया हुई अब भूले पथ को जान गये।
तर्कों और प्रमाणों से सब बात हमारी मान गये ।।
एजी अब तो गाते हैं ‘नरदेव’ वेद के बोल ।। 4 ।।
























