गर भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना।

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गर भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना।

गर भला किसी का

गर भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना।
अमृत का घूँट पिला न सको तो जहर पिलाते भी डरना ।।

अच्छा है कि तुम अपने धन से नाशाद दिलों को शाद करो।
जिसके ना आँसू पोंछ सको, उस आँख में आँसू मत भरना ।।

खामोश रहो तो बेहतर है, गर बोलो तो मीठा बोलो।
मीठा भी अगर न बोल सको, तो जहर की बारिश मत करना ।।

देवता अगर नहीं बन सकते अच्छे इन्सान ही बन जाओ।
यदि सन्मार्ग अपना न सको तो पापों में पग मत धरना ।।

अच्छा है किसी उजड़े घर को, आबाद करो इमदाद करो।
आबाद नहीं कर सकते तो बरबाद कभी भी मत करना ।।

नन्हा-सा चिराग किसी कुटिया में जलता है तो उसको जलने दो।
महलों की हवा खा करके कभी कुटिया में अँधेरा मत करना ।।

हमदर्दी का मरहम रख करके घायल के घाव को ठीक करो ।।
जख्मों पर छिड़ककर खारा नमक सुख-चैन किसी का मत हरना ।।

जगती में ‘प्रकाश’ है धन्य वही नर जो गिरतों को संभालते हैं।
तज के पर निन्दा जो जीवन को सदाचार के सांचे में ढालते हैं।।

लगती मुख कालिमा है उनके शुभ कार्य में विघ्न जो डालते हैं।
उनके कर ही सनते पहले कि जो ओरों पे कीचड़ उछालते हैं।