परमात्मा के सभी गीत गाओ

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परमात्मा के सभी गीत गाओ

परमात्मा के सभी गीत गाओ

परमात्मा के सभी गीत गाओ।
तो आवागमन से सभी छूट जाओ।

वह दुखियों का हमदर्द
अकेलों का साथी।
श्रुति जगदाधार है
उसको बताती।
अजर है अमर है
शरण उसकी आओ ।

है गागर में सागर
भरा वेद वाणी।
चहुँ ऋषियों द्वारा
गई जो बखानी।
उसी दीप से मन का
दीपक जलाओ ।

वह आनन्द है सकल
दुख हरैया।
पिता माता वही है
सखा और मैया।
उसी से करो प्रीत
प्रीतम बनाओ ।

है योगी समाधि मैं
जिसको पुकारें।
जमाने के वैभव की
चाहना विसारें।
उसी में लगन सब
तुम भी लगाओ ।

बच के तूफाँ से निकल
आयी किनारे जिंदगी।
चैन से गुजरेगी अब
तेरे सहारे जिंदगी।
तू जो मिला तो अब
कहां तारिकी-ए-गम की घुटन ।


हर तरफ है देखती
तेरे नजारे जिंदगी।
इससे पहले ‘मैं’ दबा
रहता था मैं के बोझ से।
क्या सुकून है जब से
तू ही तू पुकारे जिन्दगी।