खुदगर्जी के दिलों में
खुदगर्जी के दिलों में तूफान नजर आते हैं।
सपनों में भी पराए नुक्सान नजर आते हैं।
अपना ही उल्लू सीधा दुनिया में जो हैं करते।
अपने लिए हैं जीते, अपने लिए हैं मरते।
हैवाँ हैं दरअसल वो इन्सान नजर आते हैं।
खुदगर्जी के दिलों में…..
खिलते हैं झाड़ियों में गुल बेमिसाल अक्सर।
सच है कि गुदड़ियों में मिलते हैं लाल अक्सर।
दुनिया की ठोकरों में गुणवान नजर आते हैं।
खुदगर्जी के दिलों में…
कुछ लोग लखपति हैं और हैं कंगाल दिल के।
कुछ रखते हैं चार तिनके पर हैं विशाल दिल के।
मुझको तो ऐसे निर्धन धनवान नजर आते हैं।
खुदगर्जी के दिलों में…
जब भूख-प्यास है पर देती नहीं दिखाई।
आँखों की ‘पथिक’ ऐसे नहीं ईश तक रसाई।
अन्दर के पट खुलें तो भगवान नजर आते हैं।
खुदगर्जी के दिलों में..
























