गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो

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गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो

गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो

गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो !
भारत में हे भारतवालो !
गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो ।
हे आर्य जाति के प्रिय लालो !
गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो ।।

नृप दिलीप गौ के सेवक थे,
श्रीकृष्ण गऊ के रक्षक थे।।1।।

तुम भी गौ के संकट टालो,
गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो।।2।।

परवशता सम है ताप नहीं,
गौ-वध सम जग में पाप नहीं।।3।।

यह कुकर्म बन्द करा डालो,
गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो ।।4।।

सेवा ‘प्रकाश’ हो गौओं की,
फिर शुद्ध मिले घी, दूध, दही।।5।।

कुत्तों के झुण्ड नहीं पालो,
गौ-रक्षा हो, गौ-रक्षा हो।।6।।