गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी

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गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी

गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी

गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी
पूरी कर के दिखला दूँगा।
इस वैदिक धर्म की वेदी पर
मैं जीवन भेंट चढ़ा दूँगा।

गुरुदेव प्रतिज्ञा….

धन पास नहीं तन मन अपना
श्री गुरुचरणों में धरता हूँ।
गुरु आज्ञा पालन करने की
मैं आज प्रतिज्ञा करता हूँ।
अपना सर्वस्व लुटाकर भी
अपना कर्त्तव्य निभा दूँगा।।1।।
इस वैदिक धर्म की वेदी पर….

जन हित के लिए विष के प्याले
अमृत कर के मैं पी लूँगा।
उफ तक न करूँगा शोलों पर
हँसते-हँसते मैं जी लूँगा।
कांटों से भरी इन राहों पे
फूलों की तरह मुस्का दूँगा।।2।।
इस वैदिक धर्म की वेदी पर…..

पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते
तूफानों का मुँह मोडूंगा।
मैं सागर को मथ डालूँगा
पर्बत का मस्तक फोडूंगा।
वेदों की अमृतवाणी का
मैं घर-घर नाद बजा दूँगा।।3।।
इस वैदिक धर्म की वेदी पर…..

जब शिष्य आपका उठकर के
वेदों का बिगुल बजाएगा।
इक बार जमाना ऋषियों का
फिर ‘पथिक’ लौटकर आएगा।
भारत की पावन धरती को
फिर से मैं स्वर्ग बना दूँगा।।4।।
इस वैदिक धर्म की वेदी पर…..