जीने को तू नई से नई चीज़ बनाएगा।

0
27
जीने को तू नई से नई चीज़ बनाएगा।

कब जीना आएगा

जीने को तू नई से नई चीज़ बनाएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे कब जीना आएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे……..

१. माना कि दिन रात हो रहे आविष्कार हज़ारों।
फिर भी हाहाकार मची है दुःखी दिशाएँ चारों।
मानवता की ओर बता कब कदम बढ़ाएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे……..

२. बिन मतलब के नहीं किसी का किसी से कोई लेखा।
अपनी आँखों से सब ने हर रोज़ तमाशा देखा।
अपनों का समुदाय कहाँ तक साथ निभाएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे……….

३. चलती जाए जन्म मरण के दो पाटों की चक्की।
इस में सब जीवन पिसते हैं बात सरासर पक्की।
जो ईश्वर की शरण आ गया वो बच पाएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे………

४. बुरे काम का बुरा नतीजा निश्चित है तू जाने।
फिर भी उलटी चाल है तेरी गाए उलटे गाने।
आज ‘पथिक’ तू मौज करे कल को पछताएगा।
दुनियाँ में इनसान तुझे……