दीनानाथ की दया से आए दयानन्द देव।

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दीनानाथ की दया से आए दयानन्द देव।

दयानन्द बावनी
कवि : दुलैराय काराणी


भारत के शेर


दीनानाथ की दया से आए दयानन्द देव।
दीन-हीन देश के सुवर्ण के सुमेर थे।।

वेदधर्म व्याप्त सेवा धर्म में समाप्त हुए।
आप हु के आप्त वे गैरों के लिए गैर थे।।

सत्य के सुमित्र आप असत्य के शत्रु आप।
पाप ताप कपट कुटिलता के कहर थे।।

दिव्य द्रुग-तेज मेघ-गर्जना सा सिंह नाद।
वीर दयानन्द भूमि भारत के शेर थे।।४०।।