बल दल
दया-बल, मया-बल विमल विनोद बल।
वेद शास्त्र बल का सबल शस्त्र बल था।।
विद्या बल वाणी बल युक्ति प्रयुक्ति का बल।
पूर्ण प्रेम बल का अमल परिमल था।।
तन बल, मन बल, बाहु बल बुद्धि बल।
ब्रह्मचर्य बल पे बलिष्ठ आत्मबल था।।
असत अरिदल के बादल बिखारिरे को।
दयानन्द तेरा बल-दल ये प्रबल था।।४६।।
























