शेर बब्बर था
भारत के नरवर जगत के गुरुवर।
पुरुष-प्रवर तू प्रखर वीरवर था।।
नेता नर नाहर तू अडग गिरिवर तू।
सदा सुखकर तू शीतल सरोवर था।।
काराणी कहत गरजत महासागर सा।
असत तिमिर पर उग्र दिनकर था।।
नीडर निरभिमानी निरअभिलाषी नर।
शौर्य वीर्य साहस में शेर बब्बर था।।४५।।
























