दयानन्द बावनी
कवि दूलेराय काराणी
न तस्य प्रतिमा अस्ति
लोगों ने बनायी प्रभु प्रतिमा पूजनकाज।
अपनी अपूर्णताएं उनमें लगाई हैं॥
प्रतिमा को लगे भूख-प्यास-शीत-ताप लगे।
सोने जगाने के लिए घण्टी बनाई है॥
काराणी कहत जड़ पत्थर के पूजन ते।
तन-मन-जीवन में जड़ता जमाई है॥
चेतन के चन्द दयानन्द ने दिखाई दीनो।
न तस्य प्रतिमास्ति ये वेद की दुहाई है॥१९॥
























