दयानन्द बावनी
कवि दुलेराय काराणी
देश की दुर्दशा
भारत भूमि में वेद धुनि न सुनाई कहीं।
सुना बाइबिल सुनाई आयतें कुरान की॥
ईसू की ईमानदारी पादरी पड़ान लागे।
संग में सुनान लगीं आवाजें अजान की॥
काराणी कहत “बोड़ी बामनी” को जैसी खेत।
वैसी दशा भई सारे देश हिन्दुस्थान की॥
अधर्म का घोर अन्धकार देख-देख दयानन्द।
ने उठाई डोर धर्म की कमान की॥९॥
























