ओम नाम का सिमरन करले

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ओम नाम का सिमरन करले

ओम नाम का सिमरन करले

ओम् नाम का सिमरन करले,
कर दे भव से पार,
तुझे कह दिया कितनी बार.
तुझे……

१- जिस नगरी में वास तेरा,
वह ठग चोरों की नगरी है।
बड़े बड़े लुट जाते है,
फिर तेरी भी क्या हस्ती है
जिनको अपना समझ रहा
तू धोखा दे संसार तुझे।
कह दिया……..

२- दौलत का दीवाना बनकर
धर्म कर्म को भूल गया
पाप पुण्य का पता नहीं
क्यों नींद नशे में चूर हुआ
ईश्वर को भूल गया क्यों
कितना चदा खुमार तुझे कह दिया

३- हाथ पकड़ कर मीत
तुम्हारे इधर उधर क्यों डोल रहे।
कदम कदम पर कोयल
जैसी मीठी वाणी बोल रहे।
बनी के साथी बिगड़ी में न
गले लगाये यार तुझे।
कह दिया………

४- तुझ से पहले गए अनेकों,
कितना धन ले साथ गए
दयानन्द यह बोल गए है
सारे खाली हाथ गए।
तू भी खाली हाथ चलेगा
देखेगा नर-नार तुझे।
कह दिया……….

अपने पूर्ण पुरुषार्थ के उपरान्त उत्तम कर्मा की सिद्धि के लिए परमेश्वर से सहायता लेना प्रार्थना है।