जो तू चाहे पार उतरना, ओ३म् नाम नित गाया कर।

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ओ३म् महिमा

जो तू चाहे पार उतरना, ओ३म् नाम नित गाया कर।
चित चंचल और अपने मन को, ईश्वर भजन सिखाया कर।।
जो तू चाहे पार उतरना……

अन्तःकरण पवित्र होगा, विद्या और तपस्या से।
सभी कामना पूरी होगी, उस संग प्रीत लगाया कर ।।
जो तू चाहे पार उतरना…….

ब्रह्म मुहूर्त में उठ करके, भिक्षा माँग भंडारी से।
काया शुद्ध बनेगी तेरी, प्रातः समय उठ नहाया कर।।
जो तू चाहे पार उतरना……..

न जा मथुरा न जा काशी, मक्के और मदीने में।
मन मंदिर में रहता प्रभु है, ज्ञान की ज्योति जलाया कर।।
जो तू चाहे पार उतरना…….

विषय भोग में खो दी आयु, मूरखराज जमाने में।
सन्ध्या हवन, गायत्री पढ़कर, वेद मंत्र कुछ गाया कर।।
जो तू चाहे पार उतरना……..