नाम प्रभु का लिया नहीं, धर्म का सौदा किया नहीं।
नाम प्रभु का लिया नहीं,
धर्म का सौदा किया नहीं।
ऐसा मानव दुनियाँ में,
जी करके भी जिया नहीं।
ऐसा मानव दुनियाँ में जी करके भी………..।।1।।
जो कुछ भी इस दुनियाँ में,
देता है दिखलाई।
ईश्वर है कण-कण में समाया,
वेद ने बात बताई।
वेद का अमृत पिया नहीं,
धर्म का सौदा किया नहीं।
ऐसा मानव दुनियाँ में जी करके भी ……….।।12।।
यह धन किस के पास रहा है,
किस के पास रहेगा।
पानी का तो काम है बहना,
यह हर हाल बहेगा।
धन निर्धन को दिया नहीं,
धर्म का सौदा किया नहीं।
ऐसा मानव दुनियाँ में जी करके भी………..।।3।।
लालच मत कर लोभ छोड़ दे,
लालच बुरी बला है।
तू कर ले सन्तोष इसी में,
जो तिल फूल मिला है।
फटा हुआ दिल सिया नहीं,
धर्म का सौदा किया नहीं।
ऐसा मानव दुनियाँ में जी करके भी ……….।।4।।
लोभ वो अवगुण है जो कि प्रतिदिन तब तक बढ़ता जाता है जब तक यह मनुष्य का नाश न कर दे।










