मेरे देवता के बराबर जहां में

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मेरे देवता के बराबर जहां में

मेरे देवता के बराबर जहां में,
कहीं देवता ना कोई और होगा।
जमाने में होगें बड़े लोग पैदा,
दयानंद सा ना कोई और होगा।।

चरित्र है देखे बड़े ऊँचे ऊँचे,
नजर भर इधर भी जरा देख लेना।
चरित्र मिलेगा ऋषिवर का ऐसा,
न देखा सुना ना कोई और होगा।।

इधर सिर्फ था ब्रह्मचारी अकेला,
उधर था विरोधी यह सारा जमाना।
विजय पाने वाला दयानंद जैसा,
न अब तक हुआ न कोई और होगा।।

उठाके जमाने का इतिहास देखो,
तो अपनो के लाखों हितैषी मिलेगें।
मगर दुश्मनों का भी हित चाहने वाला,
ऋषि के सिवाना कोई और होगा।।