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आर्यों सावधान! Ahvaan के जाल से बचो!

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प्रियांशु सेठ

घोर पौराणिक और वैदिक सिद्धान्त विरोधी पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द का शिष्य जिसका नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है- जगह जगह आर्यसमाज मन्दिरों में जाता है और बिना पूर्व सूचना के वहां मौजूद लोगों से शास्त्रार्थ के नाम पर फ़ुज़ूल प्रश्न करके उन्हें अपने जाल में फंसाता है।

१. जिज्ञासा के नाम पर आपसे सवाल पूछकर हंसी उड़ाना।

२. आर्यसमाज में लोगों के वीडियो बनाना और उसे बिना अनुमति सार्वजनिक करना।

३. उसी वीडियो को कांट-छांट करके उसपर जोक्स, meme आदि बनाना।

४. हर व्यक्ति से एक ही प्रश्न को घुमा-घुमाकर पूछना।

५. अपने YouTube चैनल से आर्यसमाज और स्वामी दयानन्द को गालियां देना।

६. आर्यों से शास्त्रार्थ में हार जाने पर उनसे गाली-गलौज और मारपीट करना।यह व्यक्ति हर आर्यों के साथ ऐसे ही पेश आता है।

अब आपको इस भगौड़े की हार के नमूने दिखाता हूं-

१. दिनांक २२ जुलाई २०२४ को वैदिक संस्थान ओढव, अहमदाबाद द्वारा इसे आधिकारिक पत्रक में शास्त्रार्थ की चुनौती दी गई किन्तु यह भगौड़ा नहीं आया।

२. दिनांक १ अगस्त २०२४ को गुजरात प्रान्तीय आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा इसे शास्त्रार्थ हेतु पुनः आमन्त्रित किया गया लेकिन इसने अपनी मुंह न दिखाई।

३. दिनांक २३ नवंबर २०२४ को आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय, आबूपर्वत ने इसे शास्त्रार्थ हेतु आमन्त्रित किया था लेकिन शंकर परम्परा का यह so-called चेला नहीं आया।

४. दिल्ली में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन २०२५ में जब इसे शास्त्रार्थ के लिए आमन्त्रित किया गया था तो इसने न आने की जप-विधि शुरू कर दी।

इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि यह नियमपूर्वक शास्त्रार्थ और लिखित शास्त्रार्थ से दुम दबाकर भागता है। आख़िर चेला किसका है! जब गुरु ही शास्त्रार्थ से भागते फिरते हैं तो शिष्य भी तो उन्हीं की परम्परा का पालन करेगा। आख़िर- “गुरु-शिष्य परम्परा” को साक्षात्कार भी तो करना है! अब जानिए, इसका इलाज कैसे करना है-

१. प्रथम तो शिवांश द्विवेदी का नंबर 07408301869 अपने फोन में ब्लॉक कर दें।

२. यह जब भी शास्त्रार्थ को बोले तो अपने होश का परिचय देते हुए इसे नियमपूर्वक और लिखित शास्त्रार्थ के लिए आमन्त्रित करें।

३. इसे पूर्व के प्रश्न बदलने को कहें; क्योंकि यह एक ही प्रश्न दस जगह चिपकाता है और उसी के जोक्स बनाता है।

४. शास्त्रार्थ में इसे पराजित करने पर इसकी एक माफ़ीनामा वीडियो भी बनाएं जिसमें यह आर्यों से क्षमा मांगता दिखे और २४ घण्टे के अन्दर अपने चैनल से सारे आपत्तिजनक वीडियो हटाना कबूल करे।

५. इसे बिना अनुमति के वीडियो सार्वजनिक न करने को कहें। यदि वह ऐसा करे तो कानूनी रूप से Right to Privacy भंग करने का दावा करें।

६. आपके वीडियो पर कांट-छांट करके उपहास या जोक्स बनाने पर Fabricating False Evidence, Defamation, Provocation, Mentally Harrasment के तहत अतिशीघ्र कानूनी कार्यवाही करें।

७. यदि यह गाली-गलौज या मारपीट करे तो अविलम्ब स्थानीय पुलिस को सूचित करें और यथायोग्य कार्यवाही करें।

ध्यान रहे, हमें इसके उकसाने में नहीं आना है। बल्कि अपनी धैर्यता का परिचय देते हुए इसे पराजित करना है। यही हमारी विजय होगी। [शिवांश के किसी भी उपहास के शिकार आप न हों इसलिए यह लेख आप सबको सावधान करने हेतु लिखा गया है। आगे आप निर्णय लेने में स्वतन्त्र हैं।]