भजले ओ३म् नाम अरी रसना
भजले ओ३म् नाम अरी रसना,
जाने अन्त समय तू हिली न हिली।
क्षण भंगुर यह जीवन की कली,
जाने प्रातः काल खिली न खिली ।।
नाशवान इस देही पर,
तू कुछ मी तो भरोसा करना ना।
कलिकाल कुठार लिए डोलत,
तन कोमल चोट झिलीन झिली।
इस सुन्दर काया पर जो तू,
नित्य इत्र फुलेल छिटकता है।
पर अन्त समय मलयागिरि की,
शुचि शीतल गंध मिलीन मिली
संसार रूपी सागर में,
एक मोह का जाल बिछा है बन्दे।
तनिक सोच समझकर तैरना रे,
जाने नैया पार लगी न लगी।।
जिन्होंने गर्व किया,
मिट गये उनके वंश।
तीनों कुल तुम जान लो,
रावण, कौरव कंस ।।
























