सत्पुरुष-पुंगब सत्यवादी, संयमी श्रीराम थे।
सत्पुरुष-पुंगब सत्यवादी,
संयमी श्रीराम थे।
प्रतिभा-निदान, पराक्रमी,
धृति-शील, सद्गुणधाम थे।
परम प्रतापी, प्रजारंजक,
शत्रु विजयी वीर थे।
ज्ञानी, सदाचारी, सुखी धर्मज्ञ,
दानी धीर थे।।
कल्याणकर उसके सभी,
शुभ लक्षणों को धार लो।
पढ़ मित्र पूर्ण-पवित्र रामचरित्र,
जन्म सुधार लो। ।।1।।
श्रुति-तत्व-वेत्ता, सत्यसंघ,
कृतज्ञ, गौरववान थे।
संसार के हित में सदा,
तत्पर महाविद्वान् थे।।
निःस्पृह, प्रजाप्रिय, नयनिपुण,
अभिराम, अवगुणहीन थे।
आदर्श आर्य, उदार,
करुणासिन्धु, शुचिशालीन थे।।
वे सदा सर्व प्रकार से हैं पूजनीय,
विचार लो।
पढ़ मित्र पूर्ण-पवित्र रामचरित्र,
जीवन सुधार लो। ।2।।
श्रीराम ने तो कर दिखाया धर्म के विश्वास में।
ऐसा न कोई उदाहरण है जगत के इतिहास में।।
दृढ़ हो उन्हीं के पुण्य-पथ पर,
चाहिए चलना हमें।
हम आर्य हिन्दू-मात्र
रामचरित्र-कानन में रमें।।
होगा इसी से देश का
कल्याण सम्मति सार लो।
पढ़ मित्र पूर्ण-पवित्र
जन्म सुधार लो।।3।।
उस सद्गुणी की जीवनी को,
लक्ष्य अपना मान लें।
आओ, सखे ! सत्कर्म का
संकल्प मन में ठान लें।।
श्रद्धा-सहित हम उस
परमात्मा का निरन्तर नाम लें।
इस लोक से उद्धार पाकर
स्वर्ग में विश्राम लें।।
भ्रम त्याग ‘रामनरेश’ उर में
शक्ति-रश्मि पसार लो।
पढ़ मित्र पूर्ण पवित्र
रामचरित्र जन्म सुधार लो।।4।।










