प्रभु निराकार है, महिमा अपरम्पार है
प्रभु निराकार है, महिमा अपरम्पार है,
शरण में जो आयेगा, उसका बेड़ा पार है।
सूरज चाँद बनाया उसने,
तारे खूब सजाये हैं, तारे खूब……..
हाथों बिना पहाड़ बनाये,
सुन्दर फूल खिलाये हैं, सुन्दर फूल
प्रभु निराकार है, महिमा अपरम्पार है,
शरण में जो आयेगा, उसका बेड़ा पार है।
शुभ कामों से मानव का यह
सुन्दर चोला पाया है, सुन्दर चोला…….
विषय-विकारों में फैंस करके
इसको दाग लगाया है, इसको दाग…..
प्रभु निराकार है, महिमा अपरम्पार है,
शरण में जो आयेगा, उसका बेड़ा पार है।
बुद्धि निर्मल करो हमारी,
शरण तुम्हारी आता है,
शरण. भक्ति का दो दान हमें,
श्रद्धा से शीश झुकाते हैं, श्रद्धा से ……….
प्रभु निराकार है, महिमा अपरम्पार है,
शरण में जो आयेगा, उसका बेड़ा पार है।










