यह जीवन तुम्हारा तुम्हारे ही अर्पण।

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यह जीवन तुम्हारा तुम्हारे ही अर्पण।

यह जीवन तुम्हारा तुम्हारे ही अर्पण।
इसे अपने चरणों के काबिल बना दो।।

हो करुणा के सागर दया के हो दाता।
तुम्हीं जग के पालक तुम्हीं हो विधाता।
यह सोया है मनवा इसे तुम जगा दो।।
इसे अपने चरणों के काबिल…….

मैं पथ से गिरूँ तो मुझे थाम लेना।
दया करके सद्बुद्धि देते ही रहना।
जो सच्चा हो मार्ग वही तुम दिखा दो।।
इसे अपने चरणों के काबिल…….

तुम्हारे हवाले है जीवन की नैया।
इसे पार कर दो ऐ मेरे खिवैया।
कहीं डूब जाये ना इसको बचा लो।।
इसे अपने चरणों के काबिल…….

दरश को मैं आया हूँ जन्मों का मारा।
भटकता है मनवा यह अब भी हमारा।
इसे वश में करने की युक्ति बता दो।।
इसे अपने चरणों के काबिल ……..