चराचर जगत का स्वामी, जगत का पिता एक है।

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चराचर जगत का स्वामी, जगत का पिता एक है।

चराचर जगत का स्वामी, जगत का पिता एक है।

चराचर जगत का स्वामी,
जगत का पिता एक है।
सबके शुभ-अशुभ कर्मों का,
जिसे पूरा विवेक है।
पृथ्वी, सूरज, नभ, तारे,
चन्द्र आकाश बनाये।

वेद में परमेश्वर के,
असंख्य नाम बताये।
मुख्य नाम है ओ३म् प्रभु का,
वही है आनन्द धाम ।।1।।
ईश्वर की करें उपासना रोज सवेरे शाम

विश्व के सर्वेश्वर का,
एक ही संविधान है।
अग्नि, वायु, आदित्य,
अंगिरा को दिया ज्ञान है।
ज्ञान ऋग्वेद के अन्दर,
यजुर्वेद कर्म प्रधान है।

उपासना सामवेद में,
अथर्व में विज्ञान है।
सबसे पहले वेद की रचना,
जाने जगत तमाम ।।2।।
ईश्वर की करें उपासना रोज सवेरे शाम

हिमालय से विंध्याचल,
अटक ब्रह्मपुत्र बताया।
इनका जो मध्य भाग है,
वही आर्याव्रत कहाया।
वेद अनुकूल जीवन,
करता जो श्रेष्ठ कार्य है।

वही ईश्वर का पुत्र है,
कहाता वही आर्य है।
आर्य कहाते थे अपने को,
श्रीराम घनश्याम।।3।।
ईश्वर की करें उपासना रोज सवेरे शाम

महाभारत की फूट से,
भाग्य भारत का फूटा।
पाखण्ड और अन्ध विश्वास में,
कर्म से नाता टूटा।
रक्षक सोमनाथ है,
निकला विश्वास ये झूठा।

महमूद गजनवी ने,
सभी मन्दिरों को लूटा।
अपनी गलती समझा ‘नरेश’
पाखंड का ये परिणाम।।4।।
ईश्वर की करें उपासना रोज सवेरे शाम