प्रभु दर्शन करने आये थे, प्रभु दर्शन पाना भूल गए।

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प्रभु दर्शन करने आये थे, प्रभु दर्शन पाना भूल गए।

प्रभु दर्शन करने आये थे,
प्रभु दर्शन पाना भूल गए।
जिस पथ पर हमको जाना था,
उस पथ पर जाना भूल गए।।1।।

मानव जीवन को पाकर भी,
यह उलझन हमसे न सुलझी।
उस अन्तर्यामी के अन्दर,
हम ध्यान लगाना भूल गए।।2।।

यम नियमों के साधन द्वारा,
अपने को निर्मल कर न सके।
ऋषियों की भाँति ज्योति से,
ज्योति को मिलाना भूल गए।।3।।

अपनी ही अविद्या के कारण,
भगवान् को समझा दूर सदा।
हम खुल कर खेले पापों से,
शुभ कर्म कमाना भूल गए।।4।।

धरती के मानव हैं जितने,
भाइयों सा सबसे नाता है।
हम हिंसावादी बन बैठे,
देवों का जमाना भूल गए।।5।।

भूलें सुलझाने देश की फिर,
प्रभु भक्त दयानन्द जी आए।
ऐसे उपकारी नेता की,
आज्ञा को निभाना भूल गए।।6।।

सुविचार

अभ्यास से उबना लक्ष्य से दूर हो जाना है।