मानव सोचो जग के सुख का

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मानव सोचो जग के सुख का

मानव सोचो जग के सुख का,
विस्तार रहेगा कितने दिन ?
सत्कार रहेगा कितने दिन,
यह प्यार रहेगा कितने दिन ?

चाहे पितु हो या माता हो,
अपनी हो या सुत भ्राता,
जिनको अपना कहते उन पर,
अधिकार रहेगा कितने दिन ?
मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार…..

कोई आता है कोई जाता है,
थोड़े ही दिन का नाता है,
जिसका आश्रय लेते हो तुम,
आधार रहेगा कितने दिन ?
मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार……

जो जग में सच्चे ज्ञानी हैं,
परमात्म-तत्व के ध्यानी हैं।
उनसे पूछो मन का माना,
संसार रहेगा कितने दिन ?
मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार……

तुम प्रेम करो अविनाशी से,
मिल जाओ सब उर वासी से।
मैं’ पथिक’ यहाँ पर मेरा क्या?
व्यापार रहेगा कितने दिन ?
मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार……