जगत् साकार बनाया है निराकर प्रभु।

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जगत् साकार बनाया है निराकर प्रभु।

जगत् साकार बनाया है निराकर प्रभु।
क्या अजब खेल रचाया है निराकार प्रभु ।।1।।

लेता अवतार है भगवान, कई कहते हैं,
साफ वेदों ने बताया है, निराकार प्रभु।।2।।

कर्म करता है, बिना हाथ बिना पावों के,
देखो रामायण में आया, है निराकार प्रभु। ।3।।

चाँद सूर्य व सितारों में है, और जल थल में,
तेज ब्रह्माण्ड में छाया है निराकार प्रभु। ।4।।

देखना चाहे उसे, बाहर की आँख से जो,
उसकी दृष्टि में न आया है, निराकार प्रभु। ।5।।

है कहा स्पष्ट श्रुति ने कि ‘न तस्य प्रतिमास्ति’।
किसी बन्धन में न आया है, निराकार प्रभु।।6।।

ज्ञान चक्षु ही उसे ‘हंस’ देख सकते हैं।
मन के मन्दिर में समाया है-निराकार प्रभु। ।7।।

जगत् साकार बनाया है निराकर प्रभु।
क्या अजब खेल रचाया है निराकार प्रभु ।।8।।