ईश महिमा
दुनियाँ बनाने वाला, दुनियाँ मिटाने वाला,
सब का है दाता भगवान्, माने न माने इन्सान ।
रंग-रंग के फूल खिलाए, सूरज और चाँद बनाए,
सागर व धरती आसमान, माने न माने इन्सान ।।
आँखें न हाथ उस के, ना कोई आकार देखो।
ना ही औजार कोई, ना कोई आधार देखो।
फिर भी यह सुन्दर रचना, अद्भुत संसार देखो।
पतझड़ दिखलाने वाला, बादल बरसाने वाला,
सब का है दाता भगवान्, माने न माने इन्सान । ।। ।।
चलती न रिश्वतखोरी, उसके दरबार कोई।
सुनता है वो तो सब की, कर ले पुकार कोई।
अपना बेगाना उसका, ना रिश्तेदार कोई।
सज्जन हँसाने वाला, दुर्जन रुलाने वाला,
सब का है दाता भगवान्, माने न माने इन्सान।।2।।
निर्जन भयानक वन से, चाहो गर पार जाना।
तप और भक्ति के द्वारा, मुक्ति के द्वार जाना।
‘पथिक’ मंजिल से पहले, हिम्मत न हार जाना।
उलझन सुलझाने वाला, मार्ग दिखलाने वाला,
सब का है दाता भगवान्, माने न माने इन्सान।।3।।










