ईश्वर से महान, कोई और नहीं है।

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ईश महिमा

ईश्वर से महान, कोई और नहीं है।
उस प्रभु के समान, कोई और नहीं है।।
जग रचता पालन करता, वही एक संहर्ता है।
सृष्टि का सब वही, नियमाक एक नियन्ता है।।
समर्थ शक्तिमान कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्………….

अखिल विश्व में व्यापक है, वो है सब जगह समाया।
जग में रहता किन्तु, जगत के बन्धन में ना आया।।
सर्वत्र विद्यमान कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्…..।

सभी सत्य विद्याओं का, केवल वो ही दाता है।
आदि सृष्टि के मानव को, वो ही बोध कराता है।।
पूरा ज्ञानवान कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्………।

कैसी अद्भुत रचना, उसकी देती है दिखलाई।
सूर्य चन्द्र जैसी उसने, यह अनुपम ज्योति जलाई ।।
स्वयं ज्योतिष्मान कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्…………

सब प्राणियों को कर्मों का, देता फल बराबर है।
रहता है निष्पक्ष उसे, ना कभी किसी का डर है।।
दयालु न्यायवान कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्……….।।

ठीक-ठीक उसका वर्णन, ‘कमलेश’ कौन कर पाये।
अनुभव में आता वह केवल, शास्त्र यही बतलाये।।
प्राणियों का प्राण कोई और नहीं है।।
ईश्वर से महान्………….।