चाहे लाख मचाओं शोर कभी नहीं
चाहे लाख मचाओं
शोर कभी नहीं
बक्शें जायेगें मूर्ख
और कमजोर।। टेक ।।
रोगों में प्रधान जग
में मूर्खता कमजोरी है।।
दुखों का सामान जग
में मूर्खता कमजोरी है।
लाभ नहीं हान जग
में मूर्खता कमजोरी है।
दुष्ट बेईमान जग में
मूर्खता कमजोरी है।
निर्लज्ज शैहतान जग
में मूर्खता कमजोरी है।।
देखो करके गौर।।1 ||
मूर्ख और कमचोर को
ना जीवन में आराम होगा।
गर्दिशों का चक्कर सिर
पर फिरता आठों याम होगा।।
अच्छा काम करने पर
भी बेचारा बदनाम होगा।
सुल्टा काम करने पर
भी इससे उल्टा काम होगा।
दुर्व्यसनी व्यभिचारी दुष्ट
कोई कहता हराम होगा।।
कोई लफंगा चोर।।2।।
मूर्ख में अक्ल नहीं कमजोर
में बल नहीं।
बल के और अक्ल के
बिना जिन्दगी में कल नहीं।।
इसी लिये इनके अनुकूल
भूमण्डल नहीं ।
धूप नहीं छांव नहीं खुश्की
नहीं जल नहीं ।।
हाथी घोड़े मोटर रेल
फुलवारी महल नहीं।
रोने के शिवाय जिन्दगी
में चहल पहल नहीं।।
अन्धकार चहुं ओर ।। 3 ।।
सुख चाहो तो अविद्या
और कमजोरी का नाश करो।
लड़कों में और लड़कियों
में विद्या का प्रकाश करो।।
आसन मर्दन नित्य प्राणायाम
का अभ्यास करो।
सबसे अच्छा यह है
किसी अनुभवी के पास करो ।।
चित्त ना उदास करो
ईश्वर पर विश्वास करो।
राजा चन्द्रगुप्त करो कवि
काली दास करो ।।
नीति कार चाणक्य
विदुर मंत्री कैमास करो।
शोभाराम मिल जायेगा
जिसको तुम तलाश करो।
मत ढूंढो किसी ठोर।।4।।
उठो भी कि दिन हैं
बदलने वाले मंजिल पै
पहुंच जाते हैं चलने वाले
दीपक के लिये हठ पंतगे
मत कर बे आग भी जल
जाते हैं जलने वाले










