मैं गायक तो नहीं (धुन-मैं शायर तो नहीं)
मैं गायक तो नहीं,
मगर महर्षि दयानन्द का,
यह संदेशा हमेशा देना आ गया।।
रागों के नाम मैने सुने हैं मगर,
राग क्या है यह मुझको नहीं है खबर,
मैं तो रागियों में भी बेरागी रहा,
भाग लेता रहा पर अभागी रहा,
इस लायक तो नहीं मगर ।।1।।
जिसका तन स्वस्थ है,
और मन साफ है उसका
आठों पहर हर घड़ी जाप है
मैं तो स्वास्थ को साधन बताता फिरूँ
मन पै ज्ञान का सावुन लगाता फिरूँ
मैं पायक तो नहीं मगर।।2।।
कोई धत्त धत्त कहे या दे
वाह वाह मुझे,
नहीं किंचित भी इसकी परवाह मुझे,
मैं तो प्रेमी हूँ वेदों के प्रोग्राम का,
में हूँ वाहक दयानन्द के पैगाम का
मैं नायक तो नहीं मगर…….










