हम रुकना झुकना क्या जाने।
हम रुकना झुकना क्या जाने।
हम बढ़ते है सीना ताने ।।
हम सैनिक वीर शहीदों के।
पर हित में जिनके शीश कटे।
हम दयानन्द के दीवाने ।।१।।
हम हंस हंस कर दुःख झेलेंगे।
सर्वस्व धर्म पर दे देंगे।
हम लेखराम से मस्ताने ।।२।।
हम कर्म वचन के सच्चे हैं।
हम धुन अपनी के पक्के हैं।
हम वेद ज्योति के परवाने ।।३।।
दुःख आता है तो आने दो।
सुख जाता है तो जाने दो।
हम वीर है डरना क्या जाने।।४।।
हम वैदिक नाद बजाएंगे।
सुख शान्ति जगत् में लाएंगे।
सारी दुनियां हमको माने।।५।।










