सारे जहां के मालिक तेरा ही आसरा है।

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सारे जहां के मालिक तेरा ही आसरा है।

सारे जहां के मालिक
तेरा ही आसरा है।
राजी है हम उसी में
जिसमें तेरी रज़ा है।

हम क्या बतायें तुझकों,
सब कुछ तुम्हें खबर है,
हर हाल में हमारी
तेरी तरफ नजर है।
किस्मत है वो हमारी,
जो तेरा फैसला है।
सारे जहां के……….

हाथों को हम दुआ की
खातिर में लाये कैसे।
सजदे में तेरे आकर
सिर को झुकायें कैसे।
मजबूरियां हमारी,
सब तूही जानता है।
सारे जहां के……….

रोकर कटे या हंसकर
कटती जिन्दगानी।
तू गम दे या खुशी दे
सब तेरी मेहरबानी।
तेरी खुशी समझकर,
सब गम भुला दिया है।
सारे जहां के……….. |

दुनियां बनाके मालिक
जाने कहाँ छिपा है।
आता नहीं नजर तू बस
एक यही गिला है।
भेजा है इस जहां में
जो तेरा शुक्रिया है।
सारे जहां के……….

पुरुषौ वै प्रजापतेंनेदिष्ठम्- मनुष्य ही प्रजापति परमेश्वर के सबसे अधिक समीप है।