बनकर सूरज चांद गगन में

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बनकर सूरज चांद गगन में

राम कृष्ण दो प्यारे नाम (रामनवमी, कृष्णजन्माष्टमी में गाने योग्य गीत)

बनकर सूरज चांद गगन में
चमक रहे दो प्यारे नाम।
इक योगेश्वर कृष्ण दूसरे
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ।।

राम ने सेवा सत्यवचन और
निर्भयता को धारा।
मानव की हर मर्यादा ने
अपना रूप निखारा।

जिनको निज आदर्श
मानकर गुण गावे संसार तमाम ।।
बनकर सूरज ………

जीवन में महाराज कृष्ण ने
अद्भुत बल दिखलाया।
दुष्ट जनों का इस धरती
से नामो निशान मिटाया।

मानवता खिल उठी दिया
जब गीता का पावन पैगाम ।।
बनकर सूरज……..

मात-पिता की आज्ञा पाकर
राम ने संकट झेले।
चौदह बरस वनों में रहकर
हर मुश्किल से खेले।
त्याग तपस्या ब्रह्मचर्य से
जीत लिए कितने संग्राम।
बनकर सूरज………

नहीं मिला इतिहास
कहीं पर कृष्ण सुदामा जैसा।
निर्धन और धनवान में
जब दीवार बना नहीं पैसा।
भारत विश्व गुरु कहलाया
हुए ‘पथिक’ सुन्दर परिणाम।
बनकर सूरज………

क्रुरेरनार्यैः सौमित्रे परिहासः न कथञ्चन

राम कहते हैं कि दुष्टबुद्धि और निम्नकोटि के मनुष्यों के साथ परिहास न करना चाहिए।