जिस विधि चाहो उस विधि राखो

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जिस विधि चाहो उस विधि राखो

जिस विधि चाहो उस विधि राखो,
न कोई जोर हमारा।
तुझ बिन भगवन् इस दुनियां में,
न कोई और हमारा।।

जीवन साथी झूठे निकले,
मुझे अकेला छोड़ गए।
एक-एक ही झटके में सब
प्रेम की डोरी तोड़ गये।
चारों ओर निराशा फैली,
आश्रय एक तुम्हारा है।।
जिस विधि……..

टूटी-फूटी अपनी किश्ती,
न कोई पतवार है।
सिर पर है तूफान बला,
कौन लगावे पार है।
कौन लगावे पार प्रभु जी,
आश्रयं एक तुम्हारा है।।
जिस विधि……..

आशा की कोई किरण दिखाओ,
चारों ओर अंधेरा।
सूझे न कल्याण का रस्ता,
विपदाओं ने घेरा।
ये जीवन भी जीवन क्या है?
जीवन दो दोबारा ।।
जिस विधि………

दुःख सागर में डूब गया
तो फिर तेरी बदनामी।
भिक्षा दो आनन्द की मुझको
ऐ आनन्द के स्वामी।
“मुजरिम” का इन जुल्मों से,
अब कैसे हो छुटकारा ।।
जिस विधि……

न खुशी अच्छी, न मलाल अच्छा।
खुदा जिस हाल में रखे, वो हाल अच्छा ।।