तेरा वर्णन स्पष्ट इक इक

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तेरा वर्णन स्पष्ट इक इक

तेरा वर्णन स्पष्ट इक इक
अणु गुण धाम करता है।
चन्द्रमा दूज का झुककर
तुझे प्रणाम करता है।।

अनादि काल से सूरज उदय
और अस्त होता है।
दण्डवत तेरे चरणों में
सुबह और शाम करता है।।

तेरे भय से ही तो आकाश का
रंग पड़ गया नीला।
भगा फिरता है वायु क्या
कभी आराम करता है।।

तेरी महिमा को देखकर
सभी मनीषी चकित होते हैं।
चाकरी तेरी में, ब्रह्मण्ड
जो बेदाम करता है।।

अगर पाप में आपका दिल नहीं है।
तो ईश्वर को मिलना भी मुश्किल नहीं है।।