प्रभु हर दिल में वास करता है

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प्रभु हर दिल में वास करता है

प्रभु हर दिल में वास करता है,
जरें-जरें मे वो समाया है।
उसकी महिमा को जानते ही नहीं
जिसने संसार ये रचाया है।

नीले नभ में ये सितारे देखो,
बड़े रगींन नजारे देखो।
चांद सूरज के इशारे देखो,
बहती वायु के फुवारे देखो।
कहीं बादल की गरज
कहीं बिजली की गरज।
ये करिश्मा भी क्या करिश्मा है।

लाखों सियि रंग दीने सुमन
जिस की खुशबू से महकता है चमन।
पत्ते-पत्ते की अलग कतरन
वाह रे जगदीश तुझे है धन्य।

फूल पत्ती-लता दे रही तेरा पता सब के
आंचल में तू ही पाया है।
उंचे शैलों की निराली जो छटा,
जिन पे छाई है सुनहरी ये घटा।
कहीं लगे हैं बर्फ के टीले
सुर्ख अग्नि की कहीं जलती लटा।
कहीं नदियों का मिलन
कहीं सागर में नमन तुझे करने को
सर झुकाया है।

सारी सृष्टि को रचाने वाला,
सब को दुखों से बचाने वाला।
पापी दुष्टों को रुलाने वाला,
नये नित्य नाच नचाने वाला।
कोई क्या जान सके नहीं पहचान सके
बड़ी ‘बेमोल’ उसकी माया है।