प्राणों से भी बढ़कर प्यारा, है सत्यार्थ प्रकाश हमारा।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश हमारा।
मोहमाया तम हरने वाला,
ज्ञान उजाला करने वाला।
भव्य भावना भरने वाला,
दिव्य ज्योति का स्रोत सितारा ।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा, है सत्यार्थ प्रकाश…..
वैदिक पाठ पढ़ाने वाला,
गत गौरव गुण गाने वाला।
फिर से सतयुग लाने वाला,
दयानन्द ऋषि का चमके तारा।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश……
शुभ सन्मार्ग सुझाया इसने,
बुद्धिवाद दर्शाया इसने।
गुरुडम का गढ़ ढाया इसने,
जग में निर्भय भाव प्रचारा ।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश……
सोता देश जगाया इसने,
प्रेम विवाह बढ़ाया इसने।
स्वावलम्बन सिखलाया इसने,
इसने सत्य धर्म विस्तारा।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश…….
कोटि-कोटि जनता का जीवन,
अर्पित है इस पर समोद मन त्यागी,
सुधी, साधुओं का धन,
मानवता का सबल सहारा।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश…..
यदि इस पर संकट आएँगे,
रक्षा हित हम डट जाएँगे।
मर जाएँगे, कट जाएँगे,
मिटा न आगे मिटने हारा।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश……
जब हम प्रण पर अड़ जाते हैं,
कुछ न विरोधी कर पाते हैं।
सबके पाँव उखड़ जाते हैं,
मिलता है जिससे बल सारा ।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश……
वैदिक धर्म ध्वजा फहरावें,
वलिदेवी पर शीश चढ़ावें।
मरते-मरते गाते जावें,
अजर अमर अक्षय ध्रुव तारे।।
प्राणों से भी बढ़कर प्यारा,
है सत्यार्थ प्रकाश……
सुविचार
बहुत गजब नजारा है,
इस अजीब दुनिया का,
लोग सब कुछ बटोरते हैं,
खाली हाथ जाने के लिए।।










