तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊं मैं?

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तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊं मैं?

तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊं मैं?
सुनता मेरी कौन है, किसे सुनाऊं मैं?

जब से याद भुलाई तेरी,
लाखों कष्ट उठाये हैं।
क्या जानूं इस जीवन के अन्दर,
कितने पाप कमाये हैं।
हूं शर्मिन्दा आपसे क्या बतलाऊं मैं?
तेरे दर को छोड़ कर……..

मेरे पाप कर्म ही तुझसे,
प्रीति न करने देते हैं।।
कभी जो चाहूं मिलू आपसे,
रोक मुझे ये लेते हैं।
कैसे स्वामी आपका दर्शन पाऊँ मैं,
तेरे दर को छोड़ कर………

तू है नाथ वरों का दाता,
तुझसे सब वर पाते हैं।
ऋषि, मुनि और योगी सारे,
तेरे ही गुण गाते हैं।
छींटा दे दो ज्ञान का,
होश में आऊँ मैं।।
तेरे दर को छोड़ कर…….

जो बीती सो बीती लेकिन,
बाकी उम्र संभालूं मैं।
चरणों में ही बैठ प्रभु के,
गीत प्रेम के गा लूं मैं।।
जीवन अपने आपका
सफल बनाऊं मैं ।।
तेरे दर को छोड़ कर…….