सोचो उस प्रभु सर्वव्यापी का, अवतार भला कैसे होगा।

0
56

सोचो उस प्रभु सर्वव्यापी का,अवतार भला कैसे होगा।

सोचो उस प्रभु सर्वव्यापी का,
अवतार भला कैसे होगा।
जिसका कोई आकार नहीं,
साकार भला कैसे होगा।

वेद और शास्त्र आर्ष ग्रन्थ,
सब इसका खण्डन करते हैं,
बिन युक्ति और प्रमाणों के,
स्वीकार भला कैसे होगा।

धोखे में साधारण जनता को,
डाला है पाखण्डी लोगों ने,
लम्बे अरसे तक धोखे का,
व्यापार भला कैसे होगा।

वक्ता जहाँ मिथ्याभाषी हो,
हठधर्मी से ले काम सदा,
बतलाओ भोली जनता का,
उद्धार भला कैसे होगा।

जब स्वयं वेद यह कहते हैं,
ईश्वर अवतार नहीं लेता,
फिर “देश” सच्चाई का तुझको,
इन्कार भला कैसे होगा।

सुविचार

असतो मा सद् गमय।
हे ईश्वर ! मुझे असत् से दूर कर।
सत् की ओर ले चल।