सुख चाहे तो बुराइयों के जाना बन्दे! नजदीक नहीं,
सुख चाहे तो बुराइयों के जाना बन्दे !
नजदीक नहीं,
बचकर रहना इस दुनिया में,
पग-पग पर ठग घूम रहे।
दम लगा चरस-गाँजे की,
जो हाथी-से मद में झूम रहे।।
ऐसे नितंग, मूरख, पलंग,
देंगे सुखकारी सीख नहीं।
उलटे पथ जाना ठीक नहीं।।
लोगों के धन से उड़ा रहे हैं,
मौज लफंगे हुड़दंगे।
भूख बिन, वस्त्र दीन-दुखिया,
सरदी में सुकड़ रहे नंगे।
देना सुपात्र को सदा,
कभी देना कुपात्र को भीख नहीं।
उलटे पथ जाना ठीक नहीं।।
ग्रह राहु, केतु कहकर,
जो लोगों को खूब डराते हैं।
सोना, वस्त्र आदि लेकर,
फौरन फरार हो जाते हैं।।
सँभलो ये शूल-भरे वन हैं!
ये हैं उपवन रमणीक नहीं।
उलटे पथ जाना ठीक नहीं।।
धर्मार्थ, काम, मोक्षफल,
जो प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
सुर-दुर्लभ मानव-तन को,
वे अज्ञानी वृथा गंवाते हैं।
‘राघव’ बिन वेद-ज्ञान,
मिलती सुख-शान्ति प्रदर्शन लीक नहीं।
उलटे पथ जाना ठीक नहीं।।










