ओ३म् को न याद किया जीवन बरबाद किया।

0
60

भक्ति

ओ३म् को न याद किया जीवन बरबाद किया।
हाय रे मानव यह क्या किया तूने यह क्या किया।।

कोमल सा फूल प्यारे जिस ने बनाया तुझे,
उसके ना पास गया ले गई माया तुझे
विषयों ने वार किया पहले बीमार किया।
हाय रे मानव यह क्या किया……..

भंवरे की भाँति तूने हर गुल से प्यार किया,
एक फूल चम्पा का था उसके न पास गया।
यदि उसके पास जाता मुक्ति का आनंद पाता,
हाय रे मानव यह क्या किया ……..

बन परवाना ऋषि दयानंद आया था,
सत् की शमां के ऊपर खुद को खपाया था।
जनता के लिये जीया और जीवन वार दिया।
‘भूषण’ तूने कुछ न किया केवल खाया-पिया।
हाय रे मानव यह क्या किया …….