अगर हम नहीं देश के काम आए

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अगर हम नहीं देश के काम आए

अगर हम नहीं देश के काम आए

अगर हम नहीं देश के काम आए,
धरा क्या कहेगी गगन क्या कहेगा।

बहुत हो चुका स्वर्ग भू पर उतारें,
करें कुछ नया स्वस्थ सोचें विचारें।
अगर हम नहीं ज्योति बन झिलमिलाए-
निशा क्या कहेगी भुवन क्या कहेगी।

चलो श्रम करें देश अपना संवारें,
युगों से चढ़ी जो खुमारी उतारें।
अगर हम नहीं वक्त पर जाग पाए-
सुबह क्या कहेगी पवन क्या कहेगा।

मधुर गन्ध का अर्थ है खूब महके,
पड़े संकटों की भले मार सहके।
अगर हम नहीं पुष्प-सा मुस्काए-
व्यथा क्या कहेगी चमन क्या कहेगा।