प्रार्थना
।। स्थायी ।।
साथ ले लो पिता आगे बढ़ जाऊँगा
वरना सम्भव है मैं भी फिसल जाऊँगा
साथ ले लो पिता आगे ……..
।। अन्तरा ।।
राहें चिकनी खड़ी और पथरीली हैं
कांटों झाड़ी भरी और जहरीली हैं।
दो सहारा कि उनमें मैं फँस जाऊँगा
साथ ले लो पिता आगे……….
भोग विषयों की उठती है इक-इक लहर
मुझको उलझा डुबाने चली हर प्रहर।
दे दो पतवार वरना मैं तर पाऊँगा
साथ ले लो पिता आगे……….
दुनियाँ इस ओर कहती है आ मौज ले
पर उधर धर्म कहता है दुःख मोल ले।
तुम कहोगे मुझे जैसा कर पाऊँगा
साथ ले लो पिता आगे………
सत्य कहता हूँ भूला जब भी मैं तुझे
पाई दुनियां मगर एक न पाया तुम्हें।
बिन तुम्हारे मैं आखिर किधर जाऊँगा
साथ ले लो पिता आगे………….










